एक शादी ऐसी भी, बारातियों के लिए आई थी स्पेशल ट्रेन, पूरे शहर में बांटी थी चांदी, 7 दिन तक चला समारोह

नरेश पारीक/चूरू. आज के युग मे स्टेटस सिंबल बन चुकी शाही शादियां हमारे देश में आज से नहीं बल्कि वर्षो से होती आ रही है. शादी जितनी शाही और खर्चीली होगी उतना ही उस व्यक्ति का व्यक्तित्त्व और रुतबा और बाजार में स्टेटस तय करता है. ये धारणा आज भी लोगों के दिलो और दिमाग मे उतनी है जितनी कई साल पहले थी. हाथी, घोड़े के बाद हेलीकॉप्टर से दूल्हा-दुल्हन का आना, जाना जहां आज भी हमारे समाज मे चर्चा का विषय रहता है और उसे शाही शादी की संज्ञा दी जाती है. तो चूरू में भी कई साल पहले हुई एक ऐसी शाही शादी जिसकी चर्चा आज भी यहां के लोगो के बीच होती है.

जी हां सेठ चिरंजीलाल कोठारी की गिनती शहर के अत्यंत सम्पन्न परिवारों में होती थी जिनके घर सन 1905 में रायचन्द कोठारी का जन्म हुआ. कोठारी का बचपन अति वैभव में गुजरा फिर सन 1919 में उनकी शादी सरदार शहर के विख्यात सेठ सूरजमल भंसाली की पुत्री से हुई. इतिहासकार और रायचन्द कोठारी के 87 वर्षीय पुत्र हनुमान कोठारी बताते उस ऐतिहासिक शादी में 1100 बाराती गए थे और बारात 7 दिन तक सरदार शहर रुकी. दिलचस्प बात तो ये है कि इस शाही शादी में बारात लें जाने व वापिस लाने के लिए बीकानेर से स्पेशल ट्रेन बनकर आयी. हनुमान कोठारी बताते हैं शाही शादी में चार चांद लगाने 21 जगहों की नृत्य मंडलियों ने अपनी प्रस्तुतियां दी.

पूरे शहर में बंटी चांदी
कोठारी बताते हैं शाही शादी में शाही व्यजनों के साथ 1100 बारातियों ने सात दिनों तक लुत्फ उठाया. उन्होंने बताया कि परिवार में शादी की खुशियां इतनी की सरदार शहर में उनके नाना ने पूरे शहर में चांदी बंटवाई और चूरू में उनके दादा ने. कोठारी बताते हैं वर्षो पहले जब पूरे शहर की संख्या ही हजारों में थी उस वक्त 1100 बारातियों की बारात अपने आप मे बड़ी बात थी.

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FIRST PUBLISHED : November 14, 2023, 18:35 IST

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